अनंतमूल सारिवा या शारदा
◆गुरु और स्निग्ध(पित्त वात हर) है । ◆मधुर और तिक्त(पित्त,वात,कफ हर), ◆शीत वीर्य ,मधुर विपाक है,अतः यह काम करती है अनंत बीमारियों पर। ◆हरती है वात,पित्त, कफ तीनो दोषों को। ◆रस, रक्त,मेद, शुक्र धातु पर अच्छा कार्य। ◆अतिसार में कार्य,मूत्रल,स्वेद जनन,गर्भाशय पर कार्य 1.पाचन संस्थान पर कार्य:- रोचन,दीपन,पाचन,अनुलोमन,स्तंभन। 2.रक्त वह संस्थान:- रक्तशोधक,शोथहर,सोरायसिस,एक्जिमा,चर्म रोग,रक्त पित्त,वात रक्त,फिरंग,एक्ने,गलगंड। 3.श्वसन संस्थान:-कफघ्न,श्वास,haemoptysis, फेफड़ों की ijnury। 4.स्त्री रोग:-गर्भाशय शोधक,पोषक,गर्भ स्थापक,स्तन्य शोधक,गर्भाशय की अम्लता हरती है,Habitual abortion,गोरा बच्चा देती है। 5.पुरुष रोग:-शुक्र शोधक,शुक्र स्तंभक,शुक्र पोषक,premature ejaculation, erectile डिसफंक्शन,गुस्सा कम करती है। 6.मूत्र वह संस्थान:-मूत्र साद,मूत्र संग,मूत्र कृच्छ,कामला,किडनी फंक्शन को बिना वृक्क को क्षति पहुंछाए बढ़ाती है,पित्तज प्रमेहः में मूत्र के रंग को साफ करती है। 7.त्वक विकार:-त्वचा की समस्त व्याधि,खुजली,जलन,रक्त शोधक,व्रण,एक्ने,सोरायसिस। 8.शरीर के तापमान पर प्रभाव:-शरीर मे गर्मी,जलन,ज्वरः,संक्रमण,विषहर प्रयोग विधि:- 1.जड़ का पाउडर 3-6 gm. प्रतिदिन 2 बार भोजन के बाद। 2.रात को 1चम्मच पाउडर भिगोकर सुबह इसका पानी छानकर पी सकते हैं।